न समझा है हमें कोई,
न समझने की कोशिश ही की है,
मिल जाये हमें कोई समझने वाला,
शाएद हमारी किस्मत ही नहीं है|

na samjha hai hame koi,
na samjhne ki kosish hi ki hai,
mil jaye hame koi samjhne vala,
shayed hamari kismat hi nahi hai|

आनंद कुमार सिंह

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हुस्न आग का दरिया ही सही,
पर मिट जाएगा एक दिन|
इश्क जीने का जरिया है,
नाम कर जाएगा एक दिन|

husn aag ka dariya hi sahi,
par mit jayega ek din|
eshk jine ka jariya hai,
naam kar jayega ek din|
आनंद कुमार सिंह
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कह डाला जो कहना चाहते थे,
लिख डाला जो लिखना चाहते थे|
तुमने अपने ख्यालो से निकला हमे,
हम तो तुम्हारे दिल में रहना चाहते थे|

kah dala jo kahna chahte the,
likh dala jo likhna chahte the|
tumne apne khyaalo se nikala hume,
hum to tumhare dil me rahna chahte the|

Anand

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माना मुशकिल उन्हें बताना है,
की प्यार में दिल उनके दीवाना है,
अब अपनी बात भी हम क्या कहे,
अपना अंदाज भी शायराना है|

mana mushkil unhe batana hai,
ki pyar me dil unke diwana hai,
ab apni baat bhi hum kya kahe,
apna andaaj bhi shayarana hai|

Anand

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शायर की खूबी शाएरी से जानो,
आशिक की खूबी आशिकी से जानो,
मैंने माना है तुम्झे अपना,
तुम हमें अपना मानो मानो |

shayar ki khubi shayeri se jaano,
aashik ki khubi aashiki se jaano,
maine mana hai tumjhe apna,
tum hame apna mano na mano |

Anand

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या उठा दो जनाज़ा ही मेरा,

या खालों से मेरे जूती बना लो|

यूँ जुदा करके जीने से तो अच्छा,

तुम हमें मार ही डालो |

ya utha do janaja hi mera,

ya khalon se mere juti bana lo|

yun juda karke jine se to achha,

tum hame maar hi daalo |

Anand

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तू ज़मी के लिए,
आसमान के लिए,
तू अपने लिए,
इस ज़हां के लिए,
तू तोह्फां है खुदा का
तेरे इस महमा के लिए|

na tu zami ke liye,
na aasman ke liye,
na tu apne liye,
na is zahan ke liye,
tu tohfan hai khuda ka
tere is mehma ke liye|
Anand
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हर दिन हर एक लम्हां,
घुट घुट के जिया करते है|
हम तो जाम बेवफाई,
तेरे नाम का पिया करते है|

har din har ek lamhan,
ghut ghut ke jiya karte hai|
hum to jaam ye bevafayee,
tere naam ka piya karte hai|

Anand
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होठों ने होठों को छुआ,
होठों से ही आह निकली,
तुझे देखते ही पहली नजर में,
लगा जैसे मेरी जान निकली|

hothon nehothon ko chhuaa,
hothon se hi aah nikali,
tujhe dekhate hi pahli najar me,
laga jaise meri jaan nikali|

Anand
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तू खुश रहे ऐ दोस्त,
तो तेरी दुश्मनी भी काबुल करते है,
तेरी दोस्ती से जिया करते थे,
तेरी रंजीश पे भी मारा करते है


too khush rahe ai dost,
to terii dushmanii bhii kaabul karate hai,
terii dostii se jiyaa karate the,
terii ranjiish pe bhii maaraa karate hai
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देख के होंटो को तेरे,
कली भी शर्मा जाये,
रंग तेरा देख के,
चांदनी को पसीना आ जाये,
अब तो आ जा ए जाने तमन्ना,
की दिल को करार आ जाये |

dekh ke honto ko tere,
kalii bhii sharmaa jaaye,
rang teraa dekh ke,
chaandanii ko pasiinaa aa jaaye,
ab to aa jaa ye jaane tamannaa,
kii dil ko karaar aa jaaye |

Anand
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जाने क्यों घर से तेरे,
नजर हमारी हटती नहीं,
हम चाहते है तुम्हे पटना,
और तुम हों की पटती नहीं|

jaane
kyon ghar se tere,
najar hamaarii hatatii nahiin,
ham chaahate hai tumhe patanaa,
aur tum hon kii patatii nahiin|

Anand
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माना मुशिकल उन्हें मनाना है,
पर प्यार में दिल उनका दीवाना है,
और अपनी बात भी हम क्या कहें,
अपना मिज़ाज भी शायेराना है |

maanaa mushikal unhen manaanaa hai,
par pyaar men dil unakaa diivaanaa hai,
aur apanii baat bhii ham kyaa kahen,
apanaa mizaaj bhii shaayeraanaa hai |

Anand


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हसरते
नकाबिल, हौसले कमजोर है
बड़ी नाज़ुक ये जीवन की डोर है
गहरी निराशा-निराशा घनघोर है
थके कदम फिर भी बढ़ते तेरे ओर है

आनंद
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तू लाख इनकार कर ले जबां से,
जितना चाहे छुपा ले जहाँ से,
यह राज खुल जायेगा एक दिन,
तू होगी बाँहों में मेरे, और
मेरे नाम का सिंदूर तेरी मांग में
सज जायेगा एक दिन |
***
हाय तेरे गालों का वों तिल,
जिसने लुट लिया मेरा दिल|
गम नहीं हमे अपने दिल के जाने का
ख़ुशी है तो बस प्यार तेरा पाने का |

2001

Anand

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तेरी चाहत ने मुझे किया है दिवाना,
इसी ने बनाया है मुझे अपनों से बेगाना,
पर मुझे अब तक समझ आया,
वों तेरा नज़रे मिला के पलके झुकाना|
***
जुल्फों के साये में, आखों में डूब के,
जिंदगी अपनी हम बिता देंगें|
लाने को लबो पे हँसी तेरे
हम अपनी जान तक लूटा देंगें|
2001

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आज फिर मुलाकात हुए उनसे,
कई दिनों बाद|
हमने जो पूछा उनसे,
क्या आये आपको,
कभी हमारी याद,
कहा सुन कर,
उन्होंने हमारी बात,
कभी हकीकत में
कभी सपनो में,
कभी गैरो में,
तो कभी अपनों में,
क्या दिन थे,
क्या थी रात,
हर पल,
हर एक लम्हा,
सिर्फ आप ही आप,
हमको आते थे याद|
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जाने कितने फसे है,
चक्कर में इस तिल के|
पहले अपना एक दिल तो था,
अब रह गए बिना दिल के|
***
कल एक लड़की मिली हमें रस्ते में,
दिल लूट ले गई हमारा सस्ते में,
दिल में आया की हम उनसे कुछ बात करे,
लेकिन जब कोशिश की तो पता चला,
हम ज़बान छोड़ आये थे बसते में |

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मन तू एक है,
आशिक है तेरे हजार|
पर जला तो न उन्हें,
चाहे कर न उन्हें प्यार|
***
हमने तुम्हे दिल दिया है,
शीशा समझ के तोड़ न देना|
दुसरो की तरह तुम भी,
सतज हमरा छोड़ न देना

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दोस्त दोस्ती क्या है,
ये मैंने तुम्ही से है जाना|
अब तो तुम्हारे लिए है जीना,
तुम्हारे लिए ही है मरजाना|
***
बनता है मुझे दीवाना,
तेरा ये मुस्कराना|
तेरा मुझे डांटना ,
और फिर हँस जाना|
भूल से ही सही,
तेरा मेरे सपनो में आना|
Anand
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बनने को तो हम भी,

तुम्हारे आशिक बन जाते|

मगर आशिक तुम्हारे,

हमारा हाल बुरा कर जाते|

***

मैंने तो बस उनसे,

मांगी थी एक पप्पी,

पर उन्होंने निकाल ली सैंडल,

बनाने ओ मेरी चम्पी |

Anand

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यु तो हमारी आदत है गलतियाँ कर जाना,
पर तुम्हारी यह अदा भी अच्छी नहीं की
आके पास हमारे, फिर दूर चले जाना
बैठ के पास किसी और के , देर तक बतियाना
दूर ही बैठे सही, पर मुझे जलना
मानता हूँ की तेरा मेरा नाता नहीं कुछ ज्यादा पुराना
पर जितना भी हैं, यह विनती है की उसे भुलाना
Anand
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लुत्फ़-ए-दोज़ख भी लुत्फ़-ए-जन्नत भी
हाय किया चीज़ है मोहब्बत भी

इश्क से दूर भागने वालो
थी येही पहले अपनी आदत भी

जीने वाला बना ले जो चाहे
ज़िन्दगी खवाब है हकीकत भी

हाल-ए-दिल कह के कहा न गया
आ गई अपने सर यह तोहमत भी

नाज़-ए-अख्फे ग़म बजा लेकिन
तू ने देखि है अपनी सूरत भी?

उफ़ वो दौर-ए-निशात-ए-इश्क खुमार
लुत्फ़ देती थी जब मोसीबत भी..........
खुमार बाराबंकवी
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अब यूं दिल को सजा दी हम ने
उस की हर बात भूला दी हम ने

एक एक फूल बहुत याद आया
शाक-ए-गुल जब वो जला दी हम ने

आज तक जिस पे वो शर्माते हैं
बात वो कब की भूला दी हम ने

शर-ऐ-जहाँ राख से आबाद हुआ
आग जब दिल की बुझा दी हम ने

आज फिर यूँ बहुत याद आया व़ोह
आज फिर उस को दुआ दी हम ने

कोई तो बात है इस में फैज़ ???
हर खुशी जिस पे लूटा दी हम ने
Anonymous
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कुछ बता पिछले पहर ख़ुवाब में अन्य वाले,
किया वो दिन आयें गे फिर हम को मिलने वाले,

तुझ को आना ही था, सिर्फ बहाने थे तेरे,
वरना आजाते हैं हर हाल में अन्य वाले,

उन निगाहों ने मुझे कतल सर--आम किया,
देख्येअ आते हैं कब लाश उठाने वाले,

किसे ग़म कहार कहूँ और किसे हम दर्द कहूँ,
एक तेरे सिवा हें सब दिल को दुखाने वाले,

कुछ बता पिछले पहर खुआब में अन्य वाले,
किया वो दिन आयें गे फिर हम को मिलने वाले

Source: internet
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गर्दिश के बाद ज़ात का महवर मिला मुझे,
जिस से निकल गया था में वोही घर मिला मुझे,

ज़र्रे के एक जुजव से खुला राज़-ए-काइनात,
कतरे की वुसा'टन में समंदर मिला मुझे,

कितनी अजीब बात है जो चाहता हूँ मैं,
किस्मत से उस तरह का मुक़द्दर मिला मुझे,

मैं था की केफियात के पर्दों में क़ैद था,
वो था के हर लिहाज़ से खुल के मिला मुझे,

दुनिया की वुसा'टन में तुझे ढूंढता रहा,
लेकिन वो मेरी ज़ात क अन्दर मिला मुझे
Anonymous
अगर हों सके तो कृपा करके वुसा'टन (wussa'ton) मतलब बताये ताकि इसे सही किया जा सके|
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रघुपति राघव रजा राम, पतित पवन सीता राम सीता राम सीता राम,

भज प्यारे तु सीताराम इश्वर अल्लाह तेरो नाम, सब को सन्मति दे भगवान...

मोहनदास करमचंद गाँधी, महात्मा गाँधी, बापू, शान्ति और अहिंसा के प्रतिक, हमारे रास्ट्रपिता का जन्म आज के ही दिन 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ|

बापू ने जात-पात, घर्म, बिरादरी, भाषा, छेत्र, राज्य और देश की सीमाओं से आगे बढ़कर संपूर्ण विश्व को अपना परिवार माना और इन्ही की सेवा में अपना सारा जीवन बिता दिया| आज जब भी विश्व के महान लोगो की चर्चा होती है तो बापू का नाम बड़े गर्व से लिया जाता है| ये आजाद हवाएं बापू की ही देन है|

अब बारी हमारी है| देश और समाज को आज फिर बापू की जरूरत है| एक नहीं सैकड़ो, हजारो बापू चाहिए, हमारे देश को, हमारे विश्व को| मात्र छुट्टी की ख़ुशी मनाने और बधाई सन्देश देने मात्र से ही हमारा कर्त्तव्य पूरा नहीं होता| छमा चाहूंगा, पर बापू ने अपने जीवन काल में जो कार्य किए है अगर उनका उलेख करने बैठू को ये कुछ कुछ जायदा लम्बा हो जायेगा| आज मेरी आप सभी से एक ही आग्रह है की खर-पतवार उखाड़ दीजिये| सभी मिलकर अपने घर, समाज, देश और इस विश्व की गन्दगी साफ़ करें| जी हाँ, वहि गन्दगी जिसे देख के हम अक्सर अनदेखा कर देते है| काव्यलोक पर एक कविता मैंने लिखी थी शायेद आपमें से खुछ लोगो ने पढ़ी हो| इस कविता में मैंने कुछ गन्दगी का उलेख किया है -
http://kavyalok।com/poems-kavita-gazal-nazm/ai-humvatan-ai-humvatan/

आज समाज को नए दिशा देने की जरूरत है| इस पीडी और आने वाली पीड़ियो को गांधी की सीख़ और उपदेशो हो जानने और मानने की जरूरत है| क्यों न आप-हम ऐसे कार्य करे की विश्व हमसे प्रेरित हो और सिर्फ हमारे माँ-बाप का ही नहीं हमरे देश का सीना हमारे नाम से चौड़ा हो जाये|

Anand kumar

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हर-एक रूह की साँसों पे वज़न देख रहा हूँ
में हर-एक सख्स के हाथों में कफ़न देख रहा हूँ

ई खिरद-मंदों खुदा होने का दावा न करो
में तो इंसान में आदम को भी कम देख रहा हूँ

यह हवाओं में ज़हर और यह बीमार फिजा
काल को जो होना है अंजाम-ए-चमन देख रहा हूँ

यह खुदाओं के लिए क़त्ल-ए-खुद्दै चोर्हो
नस्ल-ए-आदम में तबाही का चलन देख रहा हूँ

रौशनी वालों अंधेरों में भी जीना सीखो
में आफताब के पैरों में थकन देख रहा हूँ


source: net

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डा राजेंद्र तेला "निरंतर" पेशे से दन्त चिकित्सक हैं| मरीजों को चिकित्सा द्वारा ही नहीं बल्कि अपने व्यंगात्मक लेखो द्वारा आराम देने का प्रयास किया| इन्हें बागबानी का शौक बचपन से रहा है,बागबानी पर तीन वर्षों तक पत्रिका"बगिया"का प्रकाशन और संपादन किया| आम जन को चिकित्सा के बारे मैं जानकारी प्रदान करने के लिए दो पुस्तकें लिखी-स्वास्थ्य दर्पण और संतुलित भोजन| यही नहीं खेलों से भी लगाव हमेशा से रहा है| खेल प्रशासक के रूप मैं १९८५ से कार्यरत हैं| समाजसेवा के लिए "कॉमन कॉज सोसाइटी",अजमेर का गठन किया| अजमेर की विश्व प्रसिद्द पुष्कर झील और सुप्रसिद्ध आना सागर झील के संरक्षण लिए संस्था ने सफल संघर्ष किया| पर्यावरण के दुश्मन, पौलीथीन पर रोक लगाने हेतु, जन हित याचिका हाईकोर्ट मैं दायर की| उसके दबाव मैं सरकार को पोलिथीन पर १ अगस्त से पाबन्दी लगानी पड़ी। वर्तमान में वे, राजस्थान टेबल टेनिस असोसीएशन के चेयरमैन है| कॉमन कॉज सोसाइटी, अजमेर के अध्यक्ष एवम कई अन्य संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।समाज और व्यक्तियों में व्याप्त दोहरेपन ने हमेशा से उन्हें कचोटा है| अपने विचारों, अनुभवों और जीवन को करीब से देखने से उत्पन्न मिश्रण को कलम द्वारा कागज़ पर उकेरने के प्रयास के फलस्वरूप १ अगस्त २०१० से लिखना प्रारंभ किया। मित्र के लेखन से प्रोत्साहित हो,अभिव्यक्ति और भावनाओं की यात्रा पर निकल पड़े, राजेंद्र जी, सच में सिर्फ कई गुणों से संपन्न ही नहीं बल्कि अपने वक्तितव एवं क़ाबलियत के प्रकाश से समाज को नई दिशा दिखा रहे हैं। आपके लेख http://nirantar-ki-kalam-se.blogspot.com/ पढ़े जा सकते है |
काव्यलोक पर डा राजेंद्र तेला "निरंतर" का योगदान किसी से छुपा नहीं हैं| अब तक इन्होने 125 से अधिक लेखो से काव्यलोक को आलंकृत किया है| आपका अपनापन और सुझावों का हमारी अब तक की यात्रा में बहुत ही योगदान है | हम आपकी लम्बी आयु, सुख एवं स्म्रिधि की सदा ही कामना करते है |

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हमने तुम्हारी याद में ,
खाना पीना छोड़ दिया
तुम तो हमसे भी आगे निकली
जो मूहं धोना ही छोड़ दिया |
***
शायद पढ़ लिया हों उसने,
दिल-हाल-हमारा,
सोचता हूँ बचेगा भी की नहीं,
सिर पर एक भी बाल हमारा |
***
डरते है यदि खुल गया,
राजे दिल का पोल,
तो सभी बजायेंगे सैंडलो से
हमारे सिर पर ढोल |
आनंद

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आप न भी मिले तो हमारे दिल में रहेंगे,
दोस्त माना है तो आपसे हर बात कहेंगे,
कब कहा हमने की वक़्त नहीं आपके लिए,
आप की याद से हर शाम आबाद रखेंगे
|

aap na bhi mile to hamare dil me rahenge
dost mana hai to aapse har baat kahenge
kab kaha hamne ki vaqt nahi aapke liye
aap ki yaad se har shaam aabad rakhenge


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अश्क घर कर गए, आखों में हमारे
डरते है, उनका दामन न भीग जाये

ashk ghar kar gaye, aakhon me hamaare
darte hai, unka daaman na bhig jaye
..

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दिन कुछ ऐसे गुजारता है को
जैसे एहसान उतारता है कोई

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

पाक गया है शज़र पे फल शायाद
फिर से पत्थर उछलता है कोई

फिर नज़र में लहू के छींटे हैं
तुम को शायद मुघालता है कोई

देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है को

din kuchh aise guzaarataa hai ko_ii
jaise ehasaan utaarataa hai ko_ii

aa_iinaa dekh ke tasallii hu_ii
ham ko is ghar meiN jaanataa hai ko_ii

pak gayaa hai shazar pe phal shayaad
phir se patthar uchhalataa hai ko_ii

phir nazar meiN lahuu ke chhiiNTe haiN
tum ko shaayad mughaalataa hai ko_ii

der se guuNjate haiN sannaaTe
jaise ham ko pukaarataa hai ko_ii


Gulzaar

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मै खुद्द ज़मी'न हूँ'न मगर ज़र्फ़ असमान का है
के टूट कर भी मेरा हौसला चट्टान का है

बुरा न मान मेरे हर्फ़ ज़हर ज़हर सही
मै क्या करू'न क यही जायेका ज़बान का है

बिछार्हते वक़्त से मै अब तलक नही रोया
वो कह गया था यही वक़्त इम्तेहान का है

हर एक घर पे मुसल्लत है दिल की वीरानी
तमाम शहर पे साया मेरे मकान का है

ये और बात अदालत है बे-खबर वरना
तमाम शहर चर्चा मेरे बयान का है

असर दिखा न सका उसके दिल में मेरा
ये तीर भी किसी टूटी हुई कमान का है

क़फ़स तौ खैर मुक़द्दर मे था मगर मोहसिन
हवा मे शोर अभी तक मेरी उडान का है

mai khudd zamee'n hoo'n magar zarf asman ka hai
k toot karr bhi mera hausla chattan ka hai

bura na maan merey harf zehr zehr sahii
mai kya karoo'n k yahi zaayeqa zabaan ka hai

bichharhte waqt se mai ab talak nahii roya
wo keh gaya tha yahi waqt imtehaan ka hai

harr aik ghar pe musallat hai dill ki veeraani
tamam shehr pe saya merey makaan ka hai

ye aur baat adalat hai be-khabar warna
tamam shehr mai charcha merey bayaan ka hai

asar dikha na saka uskey dill mai ashk mera
ye teer bhi kisi tutii hui kamaan ka hai

qafas tau khair muqaddar mai tha magar MOHSIN
hawa mai shaur abhi tak meri urrhan ka hai

"Unknown"

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बस इतनी सी इनायत मुझ पे एक बार कीजिये
कभी आ के मेरे ज़ख्मों का दीदार कीजिये

हो जाए बेगाने आप शौक़ से सनम
आपके हैं आपके रहेगे ऐतबार कीजिये

पढ़ने वाले ही डर जाएँ देख कर इसे
किताब-ए-दिल को इतना न दागदार कीजिये

न मजबूर कीजिये, के मैं उनको भूल जाऊं
मुझे मेरी वफाओं का न गुनेहगार कीजिये

इन जलते दीयों को देख कर न मुस्कुराइए
ज़रा हवाओं के चलने का इंतज़ार कीजिये

करना है इश्क आपसे करते रहेंगे हम
जो भी करना है आपको मेरे सरकार
कीजिये

Bas itni si inaayat mujh pe aik baar kijiye
Kabhi aa ke mere zakhmon ka dedaar kijiye

Ho jaaye begaane aap shauq se sanam
Aapkee hain aapkee rahegey aitbaar kijiye

Parhne waale hi darr jaayen dekh kar ise
Kitaab-e-dil ko itnaa na daagdaar kijiye

Na majboor kijiye, ke main unko bhool jaaun
Mujhe meri wafaaon ka na gunehgaar kijiye

In jalte diyon ko dekh kar na muskuraaiye
Zara hawaaon ke chalne ka intezaar kijiye

Karna hai ishq aapse karte rahenge hum
Jo bhi karna hai aapko mere sarkaar
kijiye

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वों ख़वाब बन गए मेरी नींद उड़ा के
फुर्सत में है हम पर मुलाकात नहीं होती

vo khavab ban gaye meri neend uda ke
fursat me hai hum par mulakaat nahi hoti


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Its not Frdshp day , Rose day, Valentine’s day etc etc…Wish you all a very Happy Independence day in advance…….Lets Value our Nation and the brave Fighters for a change!!!

Hello Everyone J …. Wishing you all a very Happy Friday Morning & Happy Independence Day in advance J!!

On the 15th of August every year, every Indian is made aware of the chequered past of the country. The arduous struggle for freedom and the immortal sacrifices of our freedom fighters is remembered by free India. On this day, the largest democracy of the world celebrates the gift of freedom given to her by the brave patriots. This day commemorates India's legal freedom from the British imperialist rule.
The celebrations begin in the morning when the National Flag is unfurled at the Red Fort. The Tri - color waving in the wind symbolizes the assertion of the country's freedom & her triumphant call of sovereignty.
With Independence Day knocking at our doorstep, we would like to explore some insights into our Indian National Flag.

1st.gif














Unofficial flag of India in 1906

The first national flag in India is said to have been hoisted on

August 7, 1906, in the Parsee Bagan Square (Green Park) in Calcutta now Kolkata. The flag was composed of three horizontal strips of red, yellow and green.


2nd.gif

The Berlin committee flag, first raised by Bhikaiji Cama in 1907

The second flag was hoisted in Paris by Madame Cama and her band of exiled revolutionaries in 1907 (according to some inl9OS). This was very similar to the first flag except that the top strip had only one lotus but seven stars denoting the Saptarishi. This flag was also exhibited at a socialist conference in Berlin.


3rd.gif


The flag used during the Home Rule movement in 1917

The third flag went up in 1917 when our political struggle had taken a definite turn. Dr. Annie Besant and Lokmanya Tilak hoisted it during the Home rule movement. This flag had five red and four green horizontal strips arranged alternately, with seven stars in the saptarishi configuration super-imposed on them. In the left-hand top corner (the pole end) was the Union Jack. There was also a white crescent and star in one corner.


4th.gif

The flag unofficially adopted in 1921

During the session of the All India Congress Committee which met at Bezwada in 1921 (now Vijayawada) an Andhra youth prepared a flag and took it to Gandhiji. It was made up of two colours-red and green-representing the two major communities i.e. Hindus and Muslims. Gandhiji suggested the addition of a white strip to represent the remaining communities of India and the spinning wheel to symbolise progress of the Nation.


gurlz-group [www.friendmails.net.tc]


Flag suggested by All India Congress in 1931

This flag was suggested during the All India Congress Committee session in 1931. However, the Committee's suggestion was not approved.

6th.gif

The flag adopted in 1931. This flag was also the battle ensign of the Indian National Army

The year 1931 was a landmark in the history of the flag. A resolution was passed adopting a tricolor flag as our national flag. This flag, the forbear of the present one, was saffron, white and green with Mahatma Gandhi's spinning wheel at the center. It was, however, clearly stated that it bore no communal significance and was to be interpreted thus.


7th.gif


The present Tricolour flag of India

On July 22, 1947, the Constituent Assembly adopted it as Free India National Flag. After the advent of Independence, the colours and their significance remained the same. Only the Dharma Charkha of Emperor Asoka was adopted in place of the spinning wheel as the emblem on the flag. Thus, the tricolour flag of the Congress Party eventually became the tricolour flag of Independent India.


The man who designed the Tiranga

Bhartiya Tiranga

gurlz-group [www.friendmails.net.tc]

Colours of the Flag:

In the national flag of India the top band is of Saffron colour, indicating the strength and courage of the country. The White middle band indicates peace and truth with Dharma Chakra. The last band is Green in colour shows the fertility, growth and auspiciousness of the land.

The Chakra:

This Dharma Chakra depicted the "wheel of the law" in the Sarnath Lion Capital made by the 3rd-century BC Mauryan Emperor Ashoka. The chakra intends to show that there is life in movement and death in stagnation.

Lt .Shri Pingali Venkayya

Courtesy : http://india.gov.in/

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Lets all salute our Tricolour & plan to take a firm step towards getting our country at Numero Uno position not in terms of Population & Poverty, but in terms of Technology, Economy, Peace & Prosperity.

Enjoy the hard fought Independence & have a wonderful weekend J





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मेरी दास्ताँ;ए;हसरत वो सूना सूना के रोये
मुझे आजमाने वाले मुझे आजमा के रोये

कोई ऐसा अहल;ए;दिल हों के फ़साना;ए;मोहब्बत
मैं उसे सुना के रोऊँ, वो मुझे सूना के रोये

मेरी आरज़ू की दुनिया दिल;ए;नातुवान की हसरत
जिसे खो के शादमान थे, उसे आज पा के रोये

तेरी बेवफ़ाइओ पर, तेरी काज अदाइओन पर
कभी सर झुका के रोये, कभी मुंह छुपा के रोये

जो सुनाई अंजुमन में शब्;ए;ग़म की आप बीती
कई रो के मुस्कुराये, कोई मुस्कुरा के रोये

सैफुद्दीन सैफ

meri dastan;e;hasrat wo sunaa sunaa ke roye
mujhe aazmane wale mujhe aazmaa ke roye

koi aisaa ahl;e;dil ho ke fasaana;e;mohabbat
main use suna ke roun, wo mujhe sunaa ke roye

meri aarzoo ki duniya dil;e;natuwaan ki hasrat
jise kho ke shaadman the, use aaj pa ke roye

teri bewafaaion par, teri kaj adaaion par
kabhi sar jhuka ke roye, kabhi munh chhupaa ke roye

jo sunaai anjuman mein shab;e;gham ki aap biti
kai ro ke muskuraye, koi muskura ke roye

सैफुद्दीन सैफ Saifuddin Saif

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खिल खिली है धुप,
धरती भी है मगन |
लहरे हैं झूम रही,
क्यों न हम बलखा के निकले ||

मौसम नया नया सा है,
धुले धुले से हैं रास्ते |
सब ने किया है सोलह सिंगार,
क्यों न हम ईतरा के निकले ||

हरी भरी है वादिय,
मोर नृत्य है कर रहे |
चहुँ-और है हरसो उलास,
क्यों न हम मुस्करा के निकले ||

बहारों ने किया है इंतज़ार,
वों भी आज सज़ स्वर के निकले |
मिलेंगे बड़े दिनों बाद,
क्यों न हम निखर के निकले ||

khil khili hai dhup,
dharti bhi hai magan |
lahre hain jhoom rahi,
kyo na hum balkha ke nikle ||

Mausam nya naya sa hai,
dhule dhule se hain raste |
sab ne kiya hai solah singaar,
kyo na hum iitra ke nikle ||

hari bhari hai vadiya,
mor nritya hai kar rahe |
chahun-or hai harso ulaas,
kyo na hum muskara ke nikle ||

bahaaron ne kiya hai intezaar,
vo bhi aaj saz sawar ke nikle |
milenge bade dino baad,
kyo na hum nikhar ke nikle ||

Anand

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कोई आया न आयेगा लेकिन
क्या करें गर न इंतज़ार करें
Ko_ii aayaa na aayegaa lekin
Kyaa karen gar na intazaar karen

फिराक गोरखपुरी Firaq Gorakhpuri

होने को फसल-ए-गुल भी है दावत-ए-ऐश है मगर
अपनी बहार का मुझे आज भी इंतज़ार है
Hone ko fasl-e-gul bhii hai daavat-e-aish hai magar
Apanii bahaar kaa mujhe aaj bhii intazaar hai

याह्या जस्दंवाल्ला Yahya Jasdanwalla

कहाँ है तू के तेरे इंतज़ार में ई दोस्त
तमाम रात सुलगते रहे दिल के वीराने
Kahaan hai tuu ke tere intazaar me ai dost
Tamaam raat sulagate rahe dil ke viiraane

नासिर काज़मी Nasir Kazmi

आज अश्को का तार टूट गया
रिश्ता-ए-इंतज़ार टूट गया
Aaj ashkon kaa taar TuuT gayaa
Rishtaa-e-intazaar TuuT gayaa

सैफुद्दीन सैफ Saifuddin Saif

टूटी जो आस जल गए पलकों पे सौ चिराग
निखारा कुछ और रंग शब्-ए-इंतज़ार का
TuuTii jo aas jal gaye palko.n pe sau chiraag
Nikharaa kuchh aur rang shab-e-intazaar kaa

मुमताज़ मिर्ज़ा Mumtaz Mirza

गम-ए-हयात से दिल को अभी निजात नही
निगाह-ए-नाज़ से कह दो की इंतज़ार करे
Gam-e-hayaat se dil ko abhii nijaat nahii.n
nigaah-e-naaz se kah do ki intazaar kare

शकील बदायुनी Shakeel Badayuni

तमाम उम्र तेरा इंतज़ार हमनें किया,
इस इंतज़ार में किस किस से प्यार हमने किया|
Tamam umr tera intezar humnein kiya,
Is intezar me kis kis se pyar humne kiya.

अज्ञात Unknown

कुछ दिन ए भी रंग रहा इंतज़ार में
आखँ उठ गई जिधर बस उधर देखते रहे
kuchh din ye bhii rang rahaa intazaar me
aakhan uTh gaii jidhar bas udhar dekhate rahe

असर लुच्क्नावी Asar Lucknawi

जिस मोड़ पर किये थे हम इंतज़ार बरसों
उस से लिपट के रोये दीवानावार बरसों
jis mod par kiye the ham intazaar barason
us se lipat ke roye diivaanaavaar barason

सुदर्शन फाकिर Sudarshan Faakir

तमाम उम्र तेरा इंतज़ार कर लेंगे
मगर ए रंज रहेगा की ज़िंदगी कम है
tamaam umr teraa intazaar kar lenge
magar ye ranj rahegaa ki zindagii kam hai

शहीद सिद्दीकी Shahid siddiikii

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निगाह उनसे क्या मिली, कोई दीवाना हों गया |
फिर कोई शायर बना, मॉहोल शायराना हों गया |

nigaah unse kya mili, koi diwaana ho gaya |
fir koi shayar bana, mauhol shayarana ho gaya |


काव्यलोक
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नमस्कार

आप सभी से अनुरोध है की मेरे सपने और परिश्रम पे एक नज़र डाले और ब्लॉगर की तरह ही काव्यलोक पर भीअपना प्यार बनाये रखे|

जी, काव्यलोक मेरे सपने का साकार स्वरूप है जो की आप सभी की सेवा में प्रस्तुत है वैसे तो मै निरंतर ब्लॉगर पे अपनी कोशिशे डालता रहता हूँ पर मेरी खुद की वेबसाइट हों जो मेरी सोच अनुसार हों ये सपना काव्यलोक के साथ ही साकार हुआ हालाकि अभी भी इसमें सुधर कार्य चल रहा है पर मुझे इस समय आप लोगो की सबसे जयादा जरूरत है

काव्यलोक पर आप अपनी रचना या कोई भी रचना,गीत, ग़ज़ल कुछ भी पोस्ट कर सकते है निवेदन बस इतना है की यथा संभव रचनाकार का नाम भी बताये आखिर जिस सम्मान के वों अधिकारी है वों तो उन्हें मिलना ही चाहिए

काव्यलोक पे आप किसी भी मुद्दे को उठा कर लोगो की राये भी जान सकते है यही नहीं हम लोगो से ये भी जानेंगे की उनके प्रयास क्या रहे उनके प्रयासों को सराहने के लिए उनकी स्टोरी "वाल ऑफ़ फेम" पर लगाये जाएगी

बहुत हुआ बाते करना, समय अब ठोस कदम उठाने का है समाज, देश, पृथ्वी और समस्त ब्रमांड को हमारी जरूरत है। कदम बढ़ाये, आगे आये |

धन्यवाद
आनंद कुमार
www.kavyalok.com

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धडकता है दिल अब भी,
पर इसमें अब वों बात
नहीं |

क्यों तुम्हारा मिलना अब,
खुशियों की सौगात नहीं |

क्यों मन भारी होता है,
अब तुम्हें सोच कर भी |

क्यों हमें अब कोई आस नहीं,
हमारी हसी में वों उल्लास नहीं|

क्यों बदल गए तुम इतना ,
तुम पे होता विस्वास नहीं |

क्यों दिल में सवाल उठते है,
मिलते अब इनके जवाब
नहीं |

क्यों इतने दूर तुम लगने लगे,
की तुम्हारे होने का भी एहसास
नहीं |

क्यों अब भी
खड़े हम उसी मोड़ पे,
जिसपे थामा तुमने मेरे हाथ
नहीं |

बाहें
फैली हैं अब भी आलिंगन के लिए,
जाओ होती सदा के लिए रात नहीं |

dhadktha hai dil ab bhi,
per isme ab vo baat nahi|

kyo tumhara milna ab,
khushiyo ki saugaat nahi|

kyo man bhari hota hai,
ab tumhe soch kar bhi |

kyo hame ab koi aas nahi,
hamari hasi me vo ullas
nahi|

kyo badal gaye tum itna ,
tum pe hota viswas
nahi|

kyo dil me sawaal uthte hai,
milte ab inke jawab nahi|

kyo itne dur tum lagne lage,
ki tumhare hone ka bhi ehsaas nahi
|

kyo ab bhi
khade hum usi mod pe,
jispe thama tumne mere haath nahi|

baahe
faili hain ab bhi aalingan ke liye,
aa jaoo hoti sada ke liye raat nahi

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थाम लो हाथ को मेरे
क्यों दूर जाने लगे हो

मिलते क्यों नहीं हमसे
क्यों नज़रें चुराने लगे हो

तुम्हे प्यार नहीं हमसे तो
क्यों सपनो में आने लगे हो

अगर प्यार है तो इतने
क्यों शर्त लगाने लगे हो

ऐसा क्या माँगा मैंने तुमसे
क्यों इतना घबराने लगे हो

ऐसा क्या दे सका मैं
क्यों इतना सकुचाने लगे हो

मिल जाओ हमसे बरखा बनके
क्यों बदली बन उड़ जाने लगे हो

....................................
क्यों ?


thaam lo haath ko
mere
kyon door jaane lage ho

milate kyon nahiin hamase
kyon nazaren churaane lage ho

tumhe pyaar nahiin hamase to
kyon sapano men aane lage ho

agar pyaar hai to itane
kyon shart lagaane lage ho

aisaa kyaa maangaa mainne tumase
kyon itanaa ghabaraane lage ho

aisaa kyaa n de sakaa main
kyon itanaa sakuchaane lage ho

mil jaao hamase barakhaa banake
kyon badalii ban ud jaane lage ho

............................................kyo ?


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