न समझा है हमें कोई,
न समझने की कोशिश ही की है,
मिल जाये हमें कोई समझने वाला,
शाएद हमारी किस्मत ही नहीं है|

na samjha hai hame koi,
na samjhne ki kosish hi ki hai,
mil jaye hame koi samjhne vala,
shayed hamari kismat hi nahi hai|

आनंद कुमार सिंह

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हुस्न आग का दरिया ही सही,
पर मिट जाएगा एक दिन|
इश्क जीने का जरिया है,
नाम कर जाएगा एक दिन|

husn aag ka dariya hi sahi,
par mit jayega ek din|
eshk jine ka jariya hai,
naam kar jayega ek din|
आनंद कुमार सिंह
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कह डाला जो कहना चाहते थे,
लिख डाला जो लिखना चाहते थे|
तुमने अपने ख्यालो से निकला हमे,
हम तो तुम्हारे दिल में रहना चाहते थे|

kah dala jo kahna chahte the,
likh dala jo likhna chahte the|
tumne apne khyaalo se nikala hume,
hum to tumhare dil me rahna chahte the|

Anand

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माना मुशकिल उन्हें बताना है,
की प्यार में दिल उनके दीवाना है,
अब अपनी बात भी हम क्या कहे,
अपना अंदाज भी शायराना है|

mana mushkil unhe batana hai,
ki pyar me dil unke diwana hai,
ab apni baat bhi hum kya kahe,
apna andaaj bhi shayarana hai|

Anand

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शायर की खूबी शाएरी से जानो,
आशिक की खूबी आशिकी से जानो,
मैंने माना है तुम्झे अपना,
तुम हमें अपना मानो मानो |

shayar ki khubi shayeri se jaano,
aashik ki khubi aashiki se jaano,
maine mana hai tumjhe apna,
tum hame apna mano na mano |

Anand

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या उठा दो जनाज़ा ही मेरा,

या खालों से मेरे जूती बना लो|

यूँ जुदा करके जीने से तो अच्छा,

तुम हमें मार ही डालो |

ya utha do janaja hi mera,

ya khalon se mere juti bana lo|

yun juda karke jine se to achha,

tum hame maar hi daalo |

Anand

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तू ज़मी के लिए,
आसमान के लिए,
तू अपने लिए,
इस ज़हां के लिए,
तू तोह्फां है खुदा का
तेरे इस महमा के लिए|

na tu zami ke liye,
na aasman ke liye,
na tu apne liye,
na is zahan ke liye,
tu tohfan hai khuda ka
tere is mehma ke liye|
Anand
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हर दिन हर एक लम्हां,
घुट घुट के जिया करते है|
हम तो जाम बेवफाई,
तेरे नाम का पिया करते है|

har din har ek lamhan,
ghut ghut ke jiya karte hai|
hum to jaam ye bevafayee,
tere naam ka piya karte hai|

Anand
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होठों ने होठों को छुआ,
होठों से ही आह निकली,
तुझे देखते ही पहली नजर में,
लगा जैसे मेरी जान निकली|

hothon nehothon ko chhuaa,
hothon se hi aah nikali,
tujhe dekhate hi pahli najar me,
laga jaise meri jaan nikali|

Anand
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तू खुश रहे ऐ दोस्त,
तो तेरी दुश्मनी भी काबुल करते है,
तेरी दोस्ती से जिया करते थे,
तेरी रंजीश पे भी मारा करते है


too khush rahe ai dost,
to terii dushmanii bhii kaabul karate hai,
terii dostii se jiyaa karate the,
terii ranjiish pe bhii maaraa karate hai
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देख के होंटो को तेरे,
कली भी शर्मा जाये,
रंग तेरा देख के,
चांदनी को पसीना आ जाये,
अब तो आ जा ए जाने तमन्ना,
की दिल को करार आ जाये |

dekh ke honto ko tere,
kalii bhii sharmaa jaaye,
rang teraa dekh ke,
chaandanii ko pasiinaa aa jaaye,
ab to aa jaa ye jaane tamannaa,
kii dil ko karaar aa jaaye |

Anand
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जाने क्यों घर से तेरे,
नजर हमारी हटती नहीं,
हम चाहते है तुम्हे पटना,
और तुम हों की पटती नहीं|

jaane
kyon ghar se tere,
najar hamaarii hatatii nahiin,
ham chaahate hai tumhe patanaa,
aur tum hon kii patatii nahiin|

Anand
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माना मुशिकल उन्हें मनाना है,
पर प्यार में दिल उनका दीवाना है,
और अपनी बात भी हम क्या कहें,
अपना मिज़ाज भी शायेराना है |

maanaa mushikal unhen manaanaa hai,
par pyaar men dil unakaa diivaanaa hai,
aur apanii baat bhii ham kyaa kahen,
apanaa mizaaj bhii shaayeraanaa hai |

Anand


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हसरते
नकाबिल, हौसले कमजोर है
बड़ी नाज़ुक ये जीवन की डोर है
गहरी निराशा-निराशा घनघोर है
थके कदम फिर भी बढ़ते तेरे ओर है

आनंद
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तू लाख इनकार कर ले जबां से,
जितना चाहे छुपा ले जहाँ से,
यह राज खुल जायेगा एक दिन,
तू होगी बाँहों में मेरे, और
मेरे नाम का सिंदूर तेरी मांग में
सज जायेगा एक दिन |
***
हाय तेरे गालों का वों तिल,
जिसने लुट लिया मेरा दिल|
गम नहीं हमे अपने दिल के जाने का
ख़ुशी है तो बस प्यार तेरा पाने का |

2001

Anand

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तेरी चाहत ने मुझे किया है दिवाना,
इसी ने बनाया है मुझे अपनों से बेगाना,
पर मुझे अब तक समझ आया,
वों तेरा नज़रे मिला के पलके झुकाना|
***
जुल्फों के साये में, आखों में डूब के,
जिंदगी अपनी हम बिता देंगें|
लाने को लबो पे हँसी तेरे
हम अपनी जान तक लूटा देंगें|
2001

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आज फिर मुलाकात हुए उनसे,
कई दिनों बाद|
हमने जो पूछा उनसे,
क्या आये आपको,
कभी हमारी याद,
कहा सुन कर,
उन्होंने हमारी बात,
कभी हकीकत में
कभी सपनो में,
कभी गैरो में,
तो कभी अपनों में,
क्या दिन थे,
क्या थी रात,
हर पल,
हर एक लम्हा,
सिर्फ आप ही आप,
हमको आते थे याद|
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जाने कितने फसे है,
चक्कर में इस तिल के|
पहले अपना एक दिल तो था,
अब रह गए बिना दिल के|
***
कल एक लड़की मिली हमें रस्ते में,
दिल लूट ले गई हमारा सस्ते में,
दिल में आया की हम उनसे कुछ बात करे,
लेकिन जब कोशिश की तो पता चला,
हम ज़बान छोड़ आये थे बसते में |

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मन तू एक है,
आशिक है तेरे हजार|
पर जला तो न उन्हें,
चाहे कर न उन्हें प्यार|
***
हमने तुम्हे दिल दिया है,
शीशा समझ के तोड़ न देना|
दुसरो की तरह तुम भी,
सतज हमरा छोड़ न देना

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दोस्त दोस्ती क्या है,
ये मैंने तुम्ही से है जाना|
अब तो तुम्हारे लिए है जीना,
तुम्हारे लिए ही है मरजाना|
***
बनता है मुझे दीवाना,
तेरा ये मुस्कराना|
तेरा मुझे डांटना ,
और फिर हँस जाना|
भूल से ही सही,
तेरा मेरे सपनो में आना|
Anand
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बनने को तो हम भी,

तुम्हारे आशिक बन जाते|

मगर आशिक तुम्हारे,

हमारा हाल बुरा कर जाते|

***

मैंने तो बस उनसे,

मांगी थी एक पप्पी,

पर उन्होंने निकाल ली सैंडल,

बनाने ओ मेरी चम्पी |

Anand

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यु तो हमारी आदत है गलतियाँ कर जाना,
पर तुम्हारी यह अदा भी अच्छी नहीं की
आके पास हमारे, फिर दूर चले जाना
बैठ के पास किसी और के , देर तक बतियाना
दूर ही बैठे सही, पर मुझे जलना
मानता हूँ की तेरा मेरा नाता नहीं कुछ ज्यादा पुराना
पर जितना भी हैं, यह विनती है की उसे भुलाना
Anand
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लुत्फ़-ए-दोज़ख भी लुत्फ़-ए-जन्नत भी
हाय किया चीज़ है मोहब्बत भी

इश्क से दूर भागने वालो
थी येही पहले अपनी आदत भी

जीने वाला बना ले जो चाहे
ज़िन्दगी खवाब है हकीकत भी

हाल-ए-दिल कह के कहा न गया
आ गई अपने सर यह तोहमत भी

नाज़-ए-अख्फे ग़म बजा लेकिन
तू ने देखि है अपनी सूरत भी?

उफ़ वो दौर-ए-निशात-ए-इश्क खुमार
लुत्फ़ देती थी जब मोसीबत भी..........
खुमार बाराबंकवी
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अब यूं दिल को सजा दी हम ने
उस की हर बात भूला दी हम ने

एक एक फूल बहुत याद आया
शाक-ए-गुल जब वो जला दी हम ने

आज तक जिस पे वो शर्माते हैं
बात वो कब की भूला दी हम ने

शर-ऐ-जहाँ राख से आबाद हुआ
आग जब दिल की बुझा दी हम ने

आज फिर यूँ बहुत याद आया व़ोह
आज फिर उस को दुआ दी हम ने

कोई तो बात है इस में फैज़ ???
हर खुशी जिस पे लूटा दी हम ने
Anonymous
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कुछ बता पिछले पहर ख़ुवाब में अन्य वाले,
किया वो दिन आयें गे फिर हम को मिलने वाले,

तुझ को आना ही था, सिर्फ बहाने थे तेरे,
वरना आजाते हैं हर हाल में अन्य वाले,

उन निगाहों ने मुझे कतल सर--आम किया,
देख्येअ आते हैं कब लाश उठाने वाले,

किसे ग़म कहार कहूँ और किसे हम दर्द कहूँ,
एक तेरे सिवा हें सब दिल को दुखाने वाले,

कुछ बता पिछले पहर खुआब में अन्य वाले,
किया वो दिन आयें गे फिर हम को मिलने वाले

Source: internet
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गर्दिश के बाद ज़ात का महवर मिला मुझे,
जिस से निकल गया था में वोही घर मिला मुझे,

ज़र्रे के एक जुजव से खुला राज़-ए-काइनात,
कतरे की वुसा'टन में समंदर मिला मुझे,

कितनी अजीब बात है जो चाहता हूँ मैं,
किस्मत से उस तरह का मुक़द्दर मिला मुझे,

मैं था की केफियात के पर्दों में क़ैद था,
वो था के हर लिहाज़ से खुल के मिला मुझे,

दुनिया की वुसा'टन में तुझे ढूंढता रहा,
लेकिन वो मेरी ज़ात क अन्दर मिला मुझे
Anonymous
अगर हों सके तो कृपा करके वुसा'टन (wussa'ton) मतलब बताये ताकि इसे सही किया जा सके|
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रघुपति राघव रजा राम, पतित पवन सीता राम सीता राम सीता राम,

भज प्यारे तु सीताराम इश्वर अल्लाह तेरो नाम, सब को सन्मति दे भगवान...

मोहनदास करमचंद गाँधी, महात्मा गाँधी, बापू, शान्ति और अहिंसा के प्रतिक, हमारे रास्ट्रपिता का जन्म आज के ही दिन 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ|

बापू ने जात-पात, घर्म, बिरादरी, भाषा, छेत्र, राज्य और देश की सीमाओं से आगे बढ़कर संपूर्ण विश्व को अपना परिवार माना और इन्ही की सेवा में अपना सारा जीवन बिता दिया| आज जब भी विश्व के महान लोगो की चर्चा होती है तो बापू का नाम बड़े गर्व से लिया जाता है| ये आजाद हवाएं बापू की ही देन है|

अब बारी हमारी है| देश और समाज को आज फिर बापू की जरूरत है| एक नहीं सैकड़ो, हजारो बापू चाहिए, हमारे देश को, हमारे विश्व को| मात्र छुट्टी की ख़ुशी मनाने और बधाई सन्देश देने मात्र से ही हमारा कर्त्तव्य पूरा नहीं होता| छमा चाहूंगा, पर बापू ने अपने जीवन काल में जो कार्य किए है अगर उनका उलेख करने बैठू को ये कुछ कुछ जायदा लम्बा हो जायेगा| आज मेरी आप सभी से एक ही आग्रह है की खर-पतवार उखाड़ दीजिये| सभी मिलकर अपने घर, समाज, देश और इस विश्व की गन्दगी साफ़ करें| जी हाँ, वहि गन्दगी जिसे देख के हम अक्सर अनदेखा कर देते है| काव्यलोक पर एक कविता मैंने लिखी थी शायेद आपमें से खुछ लोगो ने पढ़ी हो| इस कविता में मैंने कुछ गन्दगी का उलेख किया है -
http://kavyalok।com/poems-kavita-gazal-nazm/ai-humvatan-ai-humvatan/

आज समाज को नए दिशा देने की जरूरत है| इस पीडी और आने वाली पीड़ियो को गांधी की सीख़ और उपदेशो हो जानने और मानने की जरूरत है| क्यों न आप-हम ऐसे कार्य करे की विश्व हमसे प्रेरित हो और सिर्फ हमारे माँ-बाप का ही नहीं हमरे देश का सीना हमारे नाम से चौड़ा हो जाये|

Anand kumar

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हर-एक रूह की साँसों पे वज़न देख रहा हूँ
में हर-एक सख्स के हाथों में कफ़न देख रहा हूँ

ई खिरद-मंदों खुदा होने का दावा न करो
में तो इंसान में आदम को भी कम देख रहा हूँ

यह हवाओं में ज़हर और यह बीमार फिजा
काल को जो होना है अंजाम-ए-चमन देख रहा हूँ

यह खुदाओं के लिए क़त्ल-ए-खुद्दै चोर्हो
नस्ल-ए-आदम में तबाही का चलन देख रहा हूँ

रौशनी वालों अंधेरों में भी जीना सीखो
में आफताब के पैरों में थकन देख रहा हूँ


source: net

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