खिल खिली है धुप,
धरती भी है मगन |
लहरे हैं झूम रही,
क्यों न हम बलखा के निकले ||

मौसम नया नया सा है,
धुले धुले से हैं रास्ते |
सब ने किया है सोलह सिंगार,
क्यों न हम ईतरा के निकले ||

हरी भरी है वादिय,
मोर नृत्य है कर रहे |
चहुँ-और है हरसो उलास,
क्यों न हम मुस्करा के निकले ||

बहारों ने किया है इंतज़ार,
वों भी आज सज़ स्वर के निकले |
मिलेंगे बड़े दिनों बाद,
क्यों न हम निखर के निकले ||

khil khili hai dhup,
dharti bhi hai magan |
lahre hain jhoom rahi,
kyo na hum balkha ke nikle ||

Mausam nya naya sa hai,
dhule dhule se hain raste |
sab ne kiya hai solah singaar,
kyo na hum iitra ke nikle ||

hari bhari hai vadiya,
mor nritya hai kar rahe |
chahun-or hai harso ulaas,
kyo na hum muskara ke nikle ||

bahaaron ne kiya hai intezaar,
vo bhi aaj saz sawar ke nikle |
milenge bade dino baad,
kyo na hum nikhar ke nikle ||

Anand

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कोई आया न आयेगा लेकिन
क्या करें गर न इंतज़ार करें
Ko_ii aayaa na aayegaa lekin
Kyaa karen gar na intazaar karen

फिराक गोरखपुरी Firaq Gorakhpuri

होने को फसल-ए-गुल भी है दावत-ए-ऐश है मगर
अपनी बहार का मुझे आज भी इंतज़ार है
Hone ko fasl-e-gul bhii hai daavat-e-aish hai magar
Apanii bahaar kaa mujhe aaj bhii intazaar hai

याह्या जस्दंवाल्ला Yahya Jasdanwalla

कहाँ है तू के तेरे इंतज़ार में ई दोस्त
तमाम रात सुलगते रहे दिल के वीराने
Kahaan hai tuu ke tere intazaar me ai dost
Tamaam raat sulagate rahe dil ke viiraane

नासिर काज़मी Nasir Kazmi

आज अश्को का तार टूट गया
रिश्ता-ए-इंतज़ार टूट गया
Aaj ashkon kaa taar TuuT gayaa
Rishtaa-e-intazaar TuuT gayaa

सैफुद्दीन सैफ Saifuddin Saif

टूटी जो आस जल गए पलकों पे सौ चिराग
निखारा कुछ और रंग शब्-ए-इंतज़ार का
TuuTii jo aas jal gaye palko.n pe sau chiraag
Nikharaa kuchh aur rang shab-e-intazaar kaa

मुमताज़ मिर्ज़ा Mumtaz Mirza

गम-ए-हयात से दिल को अभी निजात नही
निगाह-ए-नाज़ से कह दो की इंतज़ार करे
Gam-e-hayaat se dil ko abhii nijaat nahii.n
nigaah-e-naaz se kah do ki intazaar kare

शकील बदायुनी Shakeel Badayuni

तमाम उम्र तेरा इंतज़ार हमनें किया,
इस इंतज़ार में किस किस से प्यार हमने किया|
Tamam umr tera intezar humnein kiya,
Is intezar me kis kis se pyar humne kiya.

अज्ञात Unknown

कुछ दिन ए भी रंग रहा इंतज़ार में
आखँ उठ गई जिधर बस उधर देखते रहे
kuchh din ye bhii rang rahaa intazaar me
aakhan uTh gaii jidhar bas udhar dekhate rahe

असर लुच्क्नावी Asar Lucknawi

जिस मोड़ पर किये थे हम इंतज़ार बरसों
उस से लिपट के रोये दीवानावार बरसों
jis mod par kiye the ham intazaar barason
us se lipat ke roye diivaanaavaar barason

सुदर्शन फाकिर Sudarshan Faakir

तमाम उम्र तेरा इंतज़ार कर लेंगे
मगर ए रंज रहेगा की ज़िंदगी कम है
tamaam umr teraa intazaar kar lenge
magar ye ranj rahegaa ki zindagii kam hai

शहीद सिद्दीकी Shahid siddiikii

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निगाह उनसे क्या मिली, कोई दीवाना हों गया |
फिर कोई शायर बना, मॉहोल शायराना हों गया |

nigaah unse kya mili, koi diwaana ho gaya |
fir koi shayar bana, mauhol shayarana ho gaya |


काव्यलोक
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नमस्कार

आप सभी से अनुरोध है की मेरे सपने और परिश्रम पे एक नज़र डाले और ब्लॉगर की तरह ही काव्यलोक पर भीअपना प्यार बनाये रखे|

जी, काव्यलोक मेरे सपने का साकार स्वरूप है जो की आप सभी की सेवा में प्रस्तुत है वैसे तो मै निरंतर ब्लॉगर पे अपनी कोशिशे डालता रहता हूँ पर मेरी खुद की वेबसाइट हों जो मेरी सोच अनुसार हों ये सपना काव्यलोक के साथ ही साकार हुआ हालाकि अभी भी इसमें सुधर कार्य चल रहा है पर मुझे इस समय आप लोगो की सबसे जयादा जरूरत है

काव्यलोक पर आप अपनी रचना या कोई भी रचना,गीत, ग़ज़ल कुछ भी पोस्ट कर सकते है निवेदन बस इतना है की यथा संभव रचनाकार का नाम भी बताये आखिर जिस सम्मान के वों अधिकारी है वों तो उन्हें मिलना ही चाहिए

काव्यलोक पे आप किसी भी मुद्दे को उठा कर लोगो की राये भी जान सकते है यही नहीं हम लोगो से ये भी जानेंगे की उनके प्रयास क्या रहे उनके प्रयासों को सराहने के लिए उनकी स्टोरी "वाल ऑफ़ फेम" पर लगाये जाएगी

बहुत हुआ बाते करना, समय अब ठोस कदम उठाने का है समाज, देश, पृथ्वी और समस्त ब्रमांड को हमारी जरूरत है। कदम बढ़ाये, आगे आये |

धन्यवाद
आनंद कुमार
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धडकता है दिल अब भी,
पर इसमें अब वों बात
नहीं |

क्यों तुम्हारा मिलना अब,
खुशियों की सौगात नहीं |

क्यों मन भारी होता है,
अब तुम्हें सोच कर भी |

क्यों हमें अब कोई आस नहीं,
हमारी हसी में वों उल्लास नहीं|

क्यों बदल गए तुम इतना ,
तुम पे होता विस्वास नहीं |

क्यों दिल में सवाल उठते है,
मिलते अब इनके जवाब
नहीं |

क्यों इतने दूर तुम लगने लगे,
की तुम्हारे होने का भी एहसास
नहीं |

क्यों अब भी
खड़े हम उसी मोड़ पे,
जिसपे थामा तुमने मेरे हाथ
नहीं |

बाहें
फैली हैं अब भी आलिंगन के लिए,
जाओ होती सदा के लिए रात नहीं |

dhadktha hai dil ab bhi,
per isme ab vo baat nahi|

kyo tumhara milna ab,
khushiyo ki saugaat nahi|

kyo man bhari hota hai,
ab tumhe soch kar bhi |

kyo hame ab koi aas nahi,
hamari hasi me vo ullas
nahi|

kyo badal gaye tum itna ,
tum pe hota viswas
nahi|

kyo dil me sawaal uthte hai,
milte ab inke jawab nahi|

kyo itne dur tum lagne lage,
ki tumhare hone ka bhi ehsaas nahi
|

kyo ab bhi
khade hum usi mod pe,
jispe thama tumne mere haath nahi|

baahe
faili hain ab bhi aalingan ke liye,
aa jaoo hoti sada ke liye raat nahi

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