दोस्त दोस्ती क्या है,
ये मैंने तुम्ही से है जाना|
अब तो तुम्हारे लिए है जीना,
तुम्हारे लिए ही है मरजाना|
***
बनता है मुझे दीवाना,
तेरा ये मुस्कराना|
तेरा मुझे डांटना ,
और फिर हँस जाना|
भूल से ही सही,
तेरा मेरे सपनो में आना|
Anand
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1 comments:

    मनोज कुमार said...

    अच्छी अभिव्यक्ति।
    या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
    आपको नवरात्र की ढेर सारी शुभकामनाएं!

  1. ... on October 8, 2010 at 12:11 AM