जाने कितने फसे है,
चक्कर में इस तिल के|
पहले अपना एक दिल तो था,
अब रह गए बिना दिल के|
***
कल एक लड़की मिली हमें रस्ते में,
दिल लूट ले गई हमारा सस्ते में,
दिल में आया की हम उनसे कुछ बात करे,
लेकिन जब कोशिश की तो पता चला,
हम ज़बान छोड़ आये थे बसते में |

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1 comments:

    बंटी चोर said...

    मेरी रचना भी पढ़े :
    एक लड़की मिली हमें रस्ते में,

    http://chorikablog.blogspot.com/2010/10/blog-post_7707.html

  1. ... on October 10, 2010 at 4:12 AM