तेरी चाहत ने मुझे किया है दिवाना,
इसी ने बनाया है मुझे अपनों से बेगाना,
पर मुझे अब तक समझ न आया,
वों तेरा नज़रे मिला के पलके झुकाना|
***
जुल्फों के साये में, आखों में डूब के,
जिंदगी अपनी हम बिता देंगें|
लाने को लबो पे हँसी तेरे
हम अपनी जान तक लूटा देंगें|
2001

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आज फिर मुलाकात हुए उनसे,
कई दिनों बाद|
हमने जो पूछा उनसे,
क्या आये आपको,
कभी हमारी याद,
कहा सुन कर,
उन्होंने हमारी बात,
कभी हकीकत में
कभी सपनो में,
कभी गैरो में,
तो कभी अपनों में,
क्या दिन थे,
क्या थी रात,
हर पल,
हर एक लम्हा,
सिर्फ आप ही आप,
हमको आते थे याद|
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जाने कितने फसे है,
चक्कर में इस तिल के|
पहले अपना एक दिल तो था,
अब रह गए बिना दिल के|
***
कल एक लड़की मिली हमें रस्ते में,
दिल लूट ले गई हमारा सस्ते में,
दिल में आया की हम उनसे कुछ बात करे,
लेकिन जब कोशिश की तो पता चला,
हम ज़बान छोड़ आये थे बसते में |

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मन तू एक है,
आशिक है तेरे हजार|
पर जला तो न उन्हें,
चाहे कर न उन्हें प्यार|
***
हमने तुम्हे दिल दिया है,
शीशा समझ के तोड़ न देना|
दुसरो की तरह तुम भी,
सतज हमरा छोड़ न देना

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दोस्त दोस्ती क्या है,
ये मैंने तुम्ही से है जाना|
अब तो तुम्हारे लिए है जीना,
तुम्हारे लिए ही है मरजाना|
***
बनता है मुझे दीवाना,
तेरा ये मुस्कराना|
तेरा मुझे डांटना ,
और फिर हँस जाना|
भूल से ही सही,
तेरा मेरे सपनो में आना|
Anand
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बनने को तो हम भी,

तुम्हारे आशिक बन जाते|

मगर आशिक तुम्हारे,

हमारा हाल बुरा कर जाते|

***

मैंने तो बस उनसे,

मांगी थी एक पप्पी,

पर उन्होंने निकाल ली सैंडल,

बनाने ओ मेरी चम्पी |

Anand

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यु तो हमारी आदत है गलतियाँ कर जाना,
पर तुम्हारी यह अदा भी अच्छी नहीं की
आके पास हमारे, फिर दूर चले जाना
बैठ के पास किसी और के , देर तक बतियाना
दूर ही बैठे सही, पर मुझे जलना
मानता हूँ की तेरा मेरा नाता नहीं कुछ ज्यादा पुराना
पर जितना भी हैं, यह विनती है की उसे न भुलाना
Anand
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लुत्फ़-ए-दोज़ख भी लुत्फ़-ए-जन्नत भी
हाय किया चीज़ है मोहब्बत भी

इश्क से दूर भागने वालो
थी येही पहले अपनी आदत भी

जीने वाला बना ले जो चाहे
ज़िन्दगी खवाब है हकीकत भी

हाल-ए-दिल कह के कहा न गया
आ गई अपने सर यह तोहमत भी

नाज़-ए-अख्फे ग़म बजा लेकिन
तू ने देखि है अपनी सूरत भी?

उफ़ वो दौर-ए-निशात-ए-इश्क खुमार
लुत्फ़ देती थी जब मोसीबत भी..........
खुमार बाराबंकवी
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अब यूं दिल को सजा दी हम ने
उस की हर बात भूला दी हम ने

एक एक फूल बहुत याद आया
शाक-ए-गुल जब वो जला दी हम ने

आज तक जिस पे वो शर्माते हैं
बात वो कब की भूला दी हम ने

शर-ऐ-जहाँ राख से आबाद हुआ
आग जब दिल की बुझा दी हम ने

आज फिर यूँ बहुत याद आया व़ोह
आज फिर उस को दुआ दी हम ने

कोई तो बात है इस में फैज़ ???
हर खुशी जिस पे लूटा दी हम ने
Anonymous
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कुछ बता पिछले पहर ख़ुवाब में अन्य वाले,
किया वो दिन आयें गे फिर हम को मिलने वाले,

तुझ को आना ही न था, सिर्फ बहाने थे तेरे,
वरना आजाते हैं हर हाल में अन्य वाले,

उन निगाहों ने मुझे कतल सर-ए-आम किया,
देख्येअ आते हैं कब लाश उठाने वाले,

किसे ग़म कहार कहूँ और किसे हम दर्द कहूँ,
एक तेरे सिवा हें सब दिल को दुखाने वाले,

कुछ बता पिछले पहर खुआब में अन्य वाले,
किया वो दिन आयें गे फिर हम को मिलने वाले

Source: internet
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